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Visitor
Visitor
Shri Ram Nath Kovind
(Hon’ble President of India)

Chancellor
Chancellor
Dr. Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
(Hon’ble Education Minister, Govt. of India)
Vice Chancellor
Vice Chancellor
Prof. P.N. Shastry
Registrar
Registrar
Prof. S. Subrahmanya Sarma
Director
Director
Prof.J.Bhanumurthy

BHOPAL Campus

भारत सरकार ने संस्कृत आयोग (1956-1957) की अनुशंसा के आधार पर संस्कृत के विकास और प्रचार-प्रसार हेतु तथा संस्कृत से सम्बद्ध केन्द्र सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के उद्देश्य से 15 अक्टूबर, 1970 को एक स्वायत्त संगठन के रूप में राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान की स्थापना की थी। उसके सदुद्देश्यों की बहुआयामी उपयोगिता को देखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने उसे मई 2002 को बहुपरिसरीय मानित विश्वविद्यालय के रूप में घोषित किया है। वर्तमान में इस मानित विश्वविद्यालय के तेरह परिसर देश के विभिन्न प्रदेशों में कार्यरत हैं। उनमें मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल नगर में शिक्षासत्र 2002-2003 से भोपाल परिसर सञ्चालित है।

तत्पश्चात् मध्यप्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल महामहिम भाई महावीर जी ने संस्थान के तत्कालीन कुलपति प्रो. वेम्पटि कुटुम्ब शास्त्री जी और परिसर संस्थापक प्राचार्य प्रो. आजाद मिश्र जी के साथ संस्कृत जगत् के मूर्धन्य विद्वज्जनों की उपस्थिति में दिनाङ्क 16 सितम्बर 2002 को भोपाल परिसर के औपचारिक उद्घाटन की उद्घोषणा की थी। तदनन्तर मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमन्त्री माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी ने अपने करकमलों से दिनाङ्क 27.02.2003 को आवंटित भूखण्ड पर परिसराधार शिलान्यास किया था। तत्पश्चात् परिसर के विकास के लिए तत्कालीन मानव संसाधन विकास मन्त्री माननीय अर्जुन सिंह जी के करकमलों से दिनाङ्क 19 सितम्बर 2005 को शैक्षिक एवं प्रशासनिक मुख्य भवन का शिलान्यास सम्पन्न हुआ था।

इस के अतिरिक्त आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 333 छात्रों का पुरुष छात्रावास, 108 छात्राओं का महिला छात्रावास, अतिथि निवास, प्राचार्य एवं कर्मचारी आवासों के निर्माण का कार्य हो गया है। परिसर में वर्तमान मं् साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, शिक्षा, जैन दर्शन तथा आधुनिक विभाग सञ्चालित हैं। साथ ही वेद, पुराण इतिहास, सांख्य योग इत्यादि विभागों की स्वीकृति परिसर के समीप उपलब्ध है। प्राकशास्त्री, शास्त्री, आचार्य, शिक्षाशास्त्री (B.Ed.), शिक्षाचार्य (M.Ed.) तथा विद्यावारिधि पाठ्यक्रम परिसर में गुणवत्तापूर्ण पद्धति से सञ्चालित किए जा रहे हैं। साथ ही अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण, वास्तु, ज्योतिष के प्रमाणपतरीय एवं पत्रोपधि पाठ्यक्रमों के साथ मुक्त स्वाध्याय पीठ में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से भी पाठ्यक्रम सञ्चालित हो रहे हैं। इस प्रकार यह परिसर संस्कृत शिक्षा के विकास हेतु निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में अग्रसर है।

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